प्रश्न 1. अन्तर्राष्ट्रीय संबंध क्या है?
उत्तर - अन्तर्राष्ट्रीय संबंध विभिन्न देशों के बीच संबंधों का अध्ययन है जिसमें राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सामरिक संबंध स्थापित होते हैं।
प्रश्न 2. अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
उत्तर - अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों के मुख्य उद्देश्य आर्थिक, राजनीतिक, सामरिक एवं सुरक्षा संबंधी हित हैं।
प्रश्न 3. यथार्थवाद की कोई एक परिभाषा दीजिए।
उत्तर - जॉन एच. हर्ज के अनुसार, "यथार्थवादी विचारों का वह समूह है जो सुरक्षा व शक्ति के घटकों की ध्वनियों को अपनी चिन्तन सामग्री मानता है। "
प्रश्न 4. मॉर्गेनथाऊ के किन्हीं दो सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।
उत्तर - (i) यथार्थवादी नियमों द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति का नियन्त्रण ।
(ii) नैतिक आदर्शों में यथार्थवादी दृष्टिकोण।
प्रश्न 5.आदर्शवादी दृष्टिकोण की दो विशेषताएँ बताइए ।
उत्तर - (i) इसे समाज के क्रमिक विकास में विश्वास है।
(ii) इसे मानव की अच्छाई में विश्वास है।
प्रश्न 6.आदर्शवाद के अनुसार विश्वयुद्ध से बचने के सुझाव दीजिए।
उत्तर - आदर्शवाद ने विश्वयुद्ध से बचने के निम्न तीन सुझाव दिये हैं—
(i) नैतिक सिद्धान्तों का पालन
(ii) सर्वाधिकार का विरोध
(iii) दण्ड का विरोध
प्रश्न 7. आदर्शवादी विश्वव्यवस्था को क्या बनाना चाहते हैं?
उत्तर - आदर्शवादी विचारक विश्व व्यवस्था को ऐसा बनाना चाहते हैं, जहाँ संघर्ष, शक्ति, तनाव, हिंसा तथा अन्याय की प्रवृत्ति न हो
प्रश्न 8. नव यथार्थवाद क्या है?
उत्तर - नव-यथार्थवाद अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का एक सिद्धान्त है जो अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में सत्ता की
राजनीति की भूमिका पर जोर देता है।
प्रश्न 9.नव यथार्थवाद के प्रवर्तक कौन थे?
उत्तर - नव-यथार्थवाद के प्रवर्तक केनेथ वाल्ट्ज थे। सर्वप्रथम वर्ष 1979 में उन्होंने अपनी पुस्तक ‘थ्योरी ऑफ इंटरनेशनल पॉलिटिक्स' में इसका उल्लेख किया।
प्रश्न 10. नव-उदारवाद का उपयोग क्या है?
उत्तर - नव-उदारवाद का उपयोग समकालीन रूप से बाजारोन्मुखी सुधार नीतियों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है जैसे कि मूल्य नियंत्रण को समाप्त करना, पूँजी बाजार को विनियमित करना, व्यापार बाधाओं को कम करना और विशेष रूप से निजीकरण और मितव्ययिता के माध्यम से, अर्थव्यवस्था में राज्य के प्रभाव को कम करना ।
प्रश्न 11. यथार्थवादी दृष्टिकोण की तीनों धारणाएँ मार्गेन्थाऊ के अनुसार किस पर आधारित हैं?
उत्तर - (i) राजनीतिज्ञों द्वारा राष्ट्रीय हितों की सिद्धि एवं प्रसार, (ii) राजनीतिक, प्रादेशिक, आर्थिक, सांस्कृतिक प्रभाव के प्रसार में राष्ट्रीय हित, तथा (iii) राष्ट्रों की नीति का शक्ति पर आधारित होना।
प्रश्न 12. मार्गेनथाऊ ने संघर्ष पर नियंत्रण के तीन उपाय कौन-कौन से बताए हैं?
उत्तर - राष्ट्रीय हितों की परिपूर्ति में संघर्ष अवश्यम्भावी है। अतः उसे रोकने के लिए मार्गेनथाऊ ने तीन उपायों को प्रस्तुत किया है— (i) नियंत्रण द्वारा, (ii) रूपान्तर द्वारा तथा (iii) समझौते द्वारा।
प्रश्न 13. मार्गेन्याऊ के सिद्धान्त के दो आलोचनात्मक आधार बताइए ।
उत्तर - आलोचना - (i) बेनो वासरमैन, रॉबर्ट टकर, कनेथ वाल्टज आदि विद्वान मार्गेन्थाक के यथार्थवाद को वैज्ञानिक न मानकर अनुमान पर आधारित मानते हैं। (ii) मार्गेन्थाऊ की पद्धति एकपक्षीय व अपूर्ण है।
प्रश्न 14. खेल सिद्धान्त क्या है?
उत्तर - खेल सिद्धान्त पारस्परिक निर्भरता से संबंधित स्थितियों में लोगों के तर्कसंगत व्यवहार का अध्ययन है। यह सिद्धान्त तर्कसंगत व्यवहार करने वाले लोगों के समूह की बातचीत के विश्लेषण करने का एक औपचारिक तरीका है।
प्रश्न 15. खेल के प्रकार बताइये।
उत्तर - खेल के निम्न प्रकार हैं- (1) शून्य जोड़ खेल - इसमें संघर्ष का स्वरूप निर्णायक होता है। एक पक्ष पूर्ण विजय जबकि दूसरा पूर्ण विनाश प्राप्त करता है। (2) सत्ता जोड़ खेल – इसमें प्रतिद्वन्द्वी दूसरो को हानि पहुँचाकर स्वयं लाभ नहीं उठाते हैं, बल्कि पारस्परिक सहयोग की भावना से प्रेरित होकर समान लाभ प्राप्त करते हैं। (3) अ- शून्य जोड़ खेल - इसकी स्थिति उपर्युक्त दोनों प्रकार के बीच की है जिसमें प्रतिद्वन्द्वियों के बीच विरोध तथा सहयोग दोनों सम्भव है।
प्रश्न 16. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में सौदेबाजी का सिद्धान्त क्या है?
उत्तर - अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में सौदेबाजी के सिद्धान्त का मुख्य जोर अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों को बातचीत के माध्यम से शांतिपूर्वक हल करने पर होता है। इस सिद्धान्त में वार्ता को मुख्य महत्व दिया जाता है।
प्रश्न 17. निर्णयपरक विश्लेषण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर - निर्णयपरक एक सामाजिक प्रक्रम है जो निर्णय के लिए कोई समस्या छाँटता है और उसके कुछ थोड़े से विकल्प निकालता है, जिनमें से कोई एक विकल्प कार्यक्रम में परिणत करने के लिए छाँट लिया जाता है।
प्रश्न 18.