प्रश्न 1. 'ह्यूमन नेचर इन पॉलिटिक्स' किसकी रचना है?
उत्तर - ग्रहम वॉलस की।
प्रश्न 2. 'न्यू आस्पेक्ट्स ऑफ पॉलिटिक्स' किसकी प्रसिद्ध कृति है?
उत्तर - चार्ल्स एडवर्ड मरियम की।
प्रश्न 3. डेविड ईस्टन ने व्यवहारवाद को किस प्रकार परिभाषित किया है?
उत्तर - राजनीति विज्ञान के अत्यन्त प्रसिद्ध विद्वान् डेविड ईस्टन के अनुसार, "व्यवहारवाद 'मनुष्य' को अध्ययन का केन्द्र बिन्दु बनाना चाहता है।" इंस्टन का कहना है कि "परम्परागत राजनीतिक वैज्ञानिक, मनुष्यों से परे, संस्थाओं को अध्ययन का केन्द्र बिन्दु बनाए हुए थे।"
प्रश्न 4. दूमैन ने व्यवहारवाद की क्या परिभाषा दी है?
उत्तर - व्यवहारवादी छात्र का उद्देश्य राजनीतिक प्रक्रिया के विज्ञान का विकास करना है।
प्रश्न 5. व्यवहारवाद की दो प्रमुख विशेषताओं के बारे में लिखिए।
उत्तर - व्यवहारवाद की विशेषताएँ - (i) मूल्य निरपेक्षता-व्यवहारवादियों के अनुसार राजनीति वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं (ii) को निष्पक्ष रहना चाहिए। निष्पक्ष होकर उन्हें सत्य का अनुसंधान करना चाहिए। सत्यापन-व्यवहारवादियों का महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त यह है कि राजनीति विज्ञान में तथ्यों अथवा निष्कर्षों के सत्यापन की व्यवस्था होनी चाहिए। इसलिए व्यवहारवादी सर्वेक्षण पर बहुत बल देते हैं।
प्रश्न 6. व्यवहारवाद की कोई चार विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर- व्यवहारवाद की चार विशेषताएँ निम्न हैं-
i) तथ्य तकनीक से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है।
ii) उत्तर-व्यवहारवाद यथार्थ से जीवित सम्पर्क रखना चाहता है।
(iii) उत्तर-व्यवहारवाद समाज में राजनीति विज्ञान की रचनात्मक भूमिका में विश्वास करता है।
(iv) मूल्यों के बारे में शोध और उसका निरन्तर विकास राजनीतिक अध्ययन का एक महत्त्वपूर्ण अंग है।
प्रश्न 7. राजनीतिक विकास के चार अभिकरण लिखिए।
उत्तर- (i) क्रान्तिकारी नेता, (ii) राजनीतिक दल, (iii) सेना, (iv) आधुनिक नौकरशाही का विकास।
प्रश्न 8. राजनीतिक व्यवस्था में कौन-कौन से गुण पाये जाते हैं?
उत्तर- (i) व्यापकता, (ii) अन्योन्याश्रय, (iii) सीमाएँ।
प्रश्न 9.राजनीतिक व्यवस्था की चार विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर- (i) राजनीतिक संरचनाओं की समानता, (ii) कार्यों की सर्वव्यापकता, (iii) विचारधारा का विकास, (iv)वैधता का अर्जन।
प्रश्न 10.राजनीतिक सिद्धान्त क्या है?
उत्तर- राजनीतिक सिद्धान्त राजनीतिक जीवन से संबंधित धारणाओं और सामान्य नियमों का वह समूह है जिसमें सरकार, राज्य और समाज की प्रकृति, उद्देश्य तथा प्रमुख विशेषताएँ एवं व्यक्ति की राजनीतिक क्षमताओं के बारे में विचार, परिकल्पनाएँ और विवरण निहित होते हैं।
प्रश्न 11.राजनीतिक सिद्धान्त के पतन के कारणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर- राजनीतिक सिद्धान्त के पतन के निम्नलिखित कारण हैं-1. इतिहासबद्ध, 2. अत्यधिक तथ्यात्मकता, 3. राजनीति वैज्ञानिकों की उद्देश्यहीनता, 4. सामाजिक विज्ञानों की सापेक्षता, 5. आधुनिक प्रवृत्तियाँ।
प्रश्न 12.विचारधारा का सिद्धान्त क्या है?
उत्तर- विचारधारा का सामान्य आशय राजनीतिक सिद्धान्त के रूप में किसी समाज या समूह में प्रचलित उन विचारों का समुच्चय है जिनके आधार पर वह किसी सामाजिक,आर्थिक और राजनीतिक संगठन विशेष को उचित या अनुचित ठहराता है।
प्रश्न 13.विचारधारा के अन्त से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- डेनियल वेल का तर्क है कि राजनीतिक विचारधारा 'समझदार' लोगों के बीच अप्रासंगिक हो गई है और भविष्य की राजनीतिक मौजूदा व्यवस्था के टुकड़े-टुकड़े समायोजन से संचालित होगी।
प्रश्न 14.नारीवाद क्या है?
उत्तर- नारीवाद एक विचारधारा है जो लिंग आधारित भेदभाव को अस्वीकार कर समानता की माँग करता है। वहीं नारीवाद एक चेतना और जागरूकता है जो नारी को समान व्यक्ति नागरिक होने के अधिकारों की माँग करता है। इसका लक्ष्य महिलाओं को भी पुरुषों के समान समानता, स्वतंत्रता प्राप्त हो।
प्रश्न 15. नारीवाद का उद्देश्य क्या है?
उत्तर- नारीवादी विचारकों का उद्देश्य स्त्रियों को पुरुष के समान बनाना नहीं बल्कि प्राकृतिक अन्तर को स्वीकार करते हुए उनकी सामर्थ्य का सम्पूर्ण उपभोग करने तथा समाज के द्वारा स्थापित कृत्रिम असमानताओं को दूर करने का प्रयास करना है क्योंकि स्त्री-पुरुष समानता स्थापित करके ही किसी भी समाज का सम्पूर्ण विकास सम्भव है।
प्रश्न 16. नारीवाद के प्रमुख प्रकार क्या हैं?
उत्तर- नारीवाद के प्रमुख प्रकार हैं- 1. उदारवादी नारीवाद, 2. उग्रवादी न 3. समाजवादी या मार्क्सवादी नारीवाद, 4. उत्तर-आधुनिक नारीवाद, 5. सा नारीवाद, 6. पर्यावरणीय नारीवाद।
प्रश्न 17. उत्तर-आधुनिकता क्या है?
उत्तर- उत्तर आधुनिकता, आधुनिकता से मुक्ति दिलाने का रूप है। यह एक विखंडित ज है। उत्तर-आधुनिकता में बहु-संस्कृतियों का निवास हो सकता है। उत्तर-आम एक विशाल अवधारणा है जो ऐतिहासिक काल, नए सांस्कृतिक तत्त्वों और स दुनिया के एक नए प्रकार के सिद्धान्त को जोड़ती है।
प्रश्न 18. उत्तर-आधुनिकता की विशेषता क्या है?
उत्तर- उत्तर-आधुनिकता, आधुनिक समाज व्यवस्था को ध्वस्त करता है। इसका जन्म आधुनिकता के प्रतिक्रिया के परिणाम स्वरूप हुआ है। इसके समर्थक विभिन्न सामाजिक कला, साहित्य, दर्शन आदि की विशेषताओं में कैद करने का विरोध करते हैं आधुनिकतावादी संश्लेषणात्मक संदर्भ को स्वीकार करने की वकालत करते मार्क्सवाद नारीवादी आंदोलन तथा परम्परागत सिद्धान्तों को नये रूप में प्रस्तुत करते हैं।
प्रश्न 19. लेनिन की पुस्तक का नाम बताइए।
उत्तर- लेनिन ने साम्राज्यवाद से सम्बन्धित सिद्धान्त का प्रतिपादन Imperialism Highest State of Capitalism में किया है।
प्रश्न 20. लेनिन के साम्यवादी दल का वर्णन कीजिए।
उत्तर- लेनिन मार्गदर्शक सिद्धान्त का प्रतिपादक है। उसने कहा कि श्रमिक वर्ग अ और सुस्त होता है। उनमें संगठन, जागरूकता और चैतन्यता की भावना भरन्न एक छोटा दायरा ही हो सकता है। यह दायरा है-साम्यवादी दल का।
प्रश्न 21. लेनिन और मार्क्स के विचारों में अन्तर बताइए।
उत्तर- मार्क्स का विचार था कि "आर्थिक व्यवस्था मनुष्य की इच्छा से स्वतंत्र ज शक्तियों के आन्तरिक विकास के द्वारा विकसित होगी। लेनिन ने कहा, "इसे की इच्छा और क्रमबद्ध आयोजन के द्वारा यूरोप के सबसे कम औद्योगिक स्थापित किया जा सकता है।"
प्रश्न 22. लेनिन की संसदीय सम्बन्धी विचारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर- लेनिन संसदीय शासन प्रणाली एवं प्रतिनिधि लोकतंत्र का विरोधी था। उसने स प्रथाओं की निन्दा की और उन्हें पूँजीवादी नियंत्रण का साधन बताया। उसका था कि संसदीय संस्थाओं का मजदूरों के लिए कोई महत्त्व नहीं है।
प्रश्न 23. लेनिन के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर- लेनिन मात्र एक दार्शनिक ही नहीं था वरन् एक कर्मयोगी भी था। वह मार्क्सवाद को स्थायी, शाश्वत सिद्धान्त न मानकर एक सजीव, प्रगतिशील और परिवर्तनशील दर्शन मानता था। उसने इसमें तात्कालिक परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में संशोधन करके इसे रूसी क्रान्ति के अनुकूल ढाला।
प्रश्न 24. माओ-त्से-तुंग का जन्म कब हुआ था?
उत्तर- माओ-त्से-तुंग का जन्म 26 दिसम्बर, 1893 को हुआ था।
प्रश्न 25. चीनी क्रान्ति का जनक कौन थे?
उत्तर- चीनी क्रान्ति के जनक माओ-त्से-तुंग थे जिन्हें आधुनिक चीन का जनक भी कहा जाता है। 16 मई, 1966 को शुरू हुई यह क्रान्ति 10 वर्षों तक चली और इसने चीन के सामाजिक ढाँचे में कई बड़े परिवर्तन किये।
प्रश्न 26. माओ ने कौन-से तीन कार्य किए हैं?
उत्तर- माओ के तीन घोषित कार्य थे-1. राष्ट्रीय एकता, 2. सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन, 3. विदेशी हस्तक्षेप से मुक्ति।
प्रश्न 27. माओ-त्से-तुंग की विचारधारा क्या थी?
उत्तर- माओ-त्से-तुंग की विचारधारा साम्यवादी विचार का एक नया रूप है जिसे माओवाद के नाम से जाना जाता है। उसने मार्क्स व लेनिन द्वारा उपेक्षित किसान वर्ग को अपने देश के अनुरूप, उन्हें सर्वाधिक महत्व देकर साम्यवाद को नया अर्थ प्रदान किया। वह सशस्त्र, विद्रोह, जन संघटन तथा रणनीतिक गठबंधनों के माध्यम से राज्य की सत्ता को किसानों को सौंपता है। माओ ने शक्ति व युद्ध को अनिवार्य मानते हुए चीन में राष्ट्रवाद की भावना का संचार किया।
प्रश्न 28. चीन में सांस्कृतिक क्रान्ति कब हुई थी?
उत्तर- चीन में सांस्कृतिक क्रान्ति 1966 में हुई थी, जो 1976 तक चला। चीन की महान सर्वहारा सांस्कृतिक क्रान्ति माओ द्वारा चलाया गया एक सामाजिक-राजनीतिक आन्दोलन था।
प्रश्न 29. माओवाद क्या है?
उत्तर- 'माओवाद 1960-70 के दशक के दौरान चरमपंथी अतिवादी माने जा रहे बुद्धिजीवी वर्ग का या उत्तेजित जनसमूह की सहज प्रतिक्रियावादी सिद्धान्त है। माओवादी माओ के इन दो प्रसिद्ध सूत्रों पर काम करते हैं- (i) राजनैतिक सत्ता बन्दूक की नली से निकलती है। (ii) राजनीति रक्तपात रहित युद्ध है और युद्ध रक्तपात युक्त राजनीति।
प्रश्न 30. एंटोनियो ग्रामसी कहाँ का निवासी था?
उत्तर- एंटोनियो ग्रामसी 20वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध का इतालवी विचारक था जिसने मार्क्सवाद की कुछ मान्यताओं के पुनर्निरूपण का प्रयत्न किया।
प्रश्न 31. ग्रामसी के लेख किस रूप में प्रकाशित हुए?
उत्तर- ग्रामसी की मृत्यु के बाद 'प्रिजन नोट बुक्स' (बंदीगृह नोट बुक 1971) में प्रकाशित हुए।
प्रश्न 32. ग्रामसी ने पूँजीवादी समाज की अधिरचना के कितने अन्तर बताये हैं?
उत्तर- (i) इनमें एक आधार के अधिक निकट है और वह परिवार स्कूल-चर्च इत्यादि के रूप में देखने को मिलता है, (ii) दूसरा राज्य का बल प्रयोगमूलंक संरचनाओं में लक्षित होता है।
प्रश्न 33. ग्रामसी के राजनीतिक विचारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर- ग्रामसी मूलतः मानवतावादी था वह किसी भी तरह के निरंकुशतंत्र के विरुद्ध था। वह क्रान्ति के द्वारा बल प्रयोगमूलक राज्य स्थापित नहीं करना चाहता था बल्कि उसके द्वारा समस्त संस्थाओं का लोकतंत्रीकरण करना चाहता था।
प्रश्न 34. नव वामपंथ आन्दोलन क्या था?
उत्तर- छटे दशक में मौजूदा सामाजिक-राजनीतिक संस्थाओं व सम्बन्धों के विरुद्ध उठ खड़ा हुआ एक विरोध आंदोलन है। यह आंदोलन प्रमुख रुप से मौजूदा पूंजीवाद एवं सामाजिक एवं राजनीतिक व्यवस्था के विरोध में था।
प्रश्न 35. नव वामपंथ के पूँजीवाद के सम्बन्ध में क्या विचार थे?
उत्तर- "वर्ग-संघर्ष के स्थान पर वर्ग सहयोग की भावना का विकास होना है। अब मजदूर वर्ग और पूँजीवादी वर्ग के हितों एवं स्वार्थों के मध्य टकराव का स्थान सहयोग एवं सामंजस्य ने ले लिया है। वस्तुतः इनका पूँजीवादीकरण हो चुका है, फलतः इनकी क्रान्तिकारिता ही समाप्त हो गयी है।"
प्रश्न 36. हरबर्ट मार्च्यूज के राजनीतिक विचारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर- हरबर्ट मार्फ्यूज एक नवीन समाजवादी दर्शन का प्रतिपादन किया है जिसे 'उदारतावादी समाजवाद' कहते हैं।
प्रश्न 37. हरबर्ट मार्च्यूज के दर्शन की आलोचना कीजिए।
उत्तर- (i) मार्फ्यूज का दर्शन आदर्शवाद की उड़ान के अतिरिक्त कुछ नहीं है। उसने साधनों का विशिष्ट वर्णन नहीं किया है। (ii) मार्फ्यूज राजनीतिक दलों की स्थापना के विरुद्ध है परन्तु छोटे-छोटे ग्रुपों क़ा पक्षपाती है । मार्फ्यूज के क्रान्ति के सम्बन्ध में विचार बताइए।
समाज की परिस्थितियाँ मानव क्षमताओं का विकास करने, उसके व्यक्तित्व के विकास में सहायक होते हैं और उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में असमर्थ है तो इस स्थिति में समाज की उन परिस्थितियों को परिवर्तित करने के लिए क्रान्ति अथवा क्रान्तिकारी परिवर्तनों का आह्वान किया जा सकता है।
प्रश्न 38. मार्फ्यूज के उदारवादी विचारों को बताइए।
उत्तर- "उदारवाद उस काल का यूरोपीय औद्योगिक पूँजीवाद का सामाजिक और आर्थिक सिद्धान्त था जब पूँजीवाद का असली आर्थिक वाहक व्यक्तिपरक पूँजीवाद था अर्थात् निजी उद्यमी थे।"
प्रश्न 39. मैकफर्सन का राजनीतिक दर्शन में महत्त्वपूर्ण योगदान क्या है?
उत्तर- राजनीतिक दर्शन में मैकफर्सन का सबसे प्रसिद्ध योगदान 'स्वामित्वपूर्ण व्यक्तिवाद' का सिद्धान्त है, जिसमें एक व्यक्ति को अपने कौशल के एकमात्र स्वामी के रूप में कल्पना की जाती है और उनके लिए समाज का कुछ भी विचारधारा नहीं है।
प्रश्न 40. रॉबर्ट नॉजिक की प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर- रॉबर्ट नॉजिक की प्रमुख रचनाएँ हैं- (i) अनार्की स्टेट एंड यूटोपिया, (ii) जिग-जैग ऑफ पॉलिटिक्स, (iii) द एक्जामिन्ड लाइफ, (iv) द नेचर ऑफ रैशनैलिटी ।
प्रश्न 41. रॉबर्ट नाजिक के न्याय के अधिकार के तीन मुख्य नियम क्या हैं?
उत्तर- 1. न्यायपूर्ण अधिग्रहण, 2. न्यायपूर्ण हस्तांतरण, 3. अन्याय के निवारण के नियम।
प्रश्न 42. जॉन रॉल्स का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर- जॉन रॉल्स का जन्म 21 फरवरी, 1921 को संयुक्त राज्य अमेरिका के बाल्टीमोर, मेरीलैंड में हुआ था।
प्रश्न 43. जॉन रॉल्स की मृत्यु कब हुई थी?
उत्तर- जॉन रॉल्स की मृत्यु लगभग 81 वर्ष की आयु में 24 नवंबर, 2002 को हुई थी।
प्रश्न 44. जॉन रॉल्स की प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर- जॉन रॉल्स की प्रमुख रचनाएँ हैं-ए थ्योरी ऑफ जस्टिस, पॉलिटिकल लिबरलिज्म, दि लॉ ऑफ पीपुल्स, लेक्चर्स ऑन दि हिस्ट्री ऑफ मोरल फिलॉसोफी।
प्रश्न 45. जॉन रॉल्स के अनुसार न्याय की समस्या क्या है?
उत्तर- जॉन रॉल्स के अनुसार न्याय की समस्या प्राथमिक वस्तुओं के वितरण की है, ये प्राथमिक वस्तुएँ हैं-अधिकार व स्वतंत्रताएँ, शक्तियाँ, अवसर, आय, सम्पदा तथा आत्म-सम्मान के साधन।
प्रश्न 46. जॉन रॉल्स के अनुसार न्याय का क्या अर्थ है?
उत्तर- जॉन रॉल्स के अनुसार न्याय का अर्थ है प्राथमिक वस्तुओं का न्यायपूर्ण वितरण अर्थात् अधिकार और स्वतंत्रता, शक्ति तथा अवसर, आय एवं सम्पत्ति इत्यादि का समान वितरण होना चाहिए। रॉल्स का मत है कि यदि न्यायपूर्ण वितरण को स्वीकार कर लिया जाए तो समाज में न्याय की स्थापना हो सकती है। रॉल्स के अनुसार यही सामाजिक न्याय है।
प्रश्न 47. जॉन रॉल्स के सामाजिक न्याय के सिद्धान्त की स्थापना कैसे होगी?
उत्तर- जॉन रॉल्स के अनुसार सामाजिक न्याय के सिद्धान्त की स्थापना दो नियमों से होगी - 1. प्रत्येक व्यक्ति को सर्वाधिक मूल स्वतंत्रता का समान अधिकार हो और यही अधिकार दूसरों को भी है। 2. सामाजिक तथा आर्थिक असमानताओं को इस रूप में व्यवस्थित करना चाहिए कि (क) न्यूनतम सुविधा प्राप्त व्यक्तियों को सर्वाधिक लाभ मिले। (ख) ये विषमताएँ इस तरह से व्यवस्थित हों कि अवसर को उचित समानता के अन्तर्गत सभी के लिए पद और स्थितियाँ खुली हों।
प्रश्न 48. जॉन रॉल्स के न्याय सिद्धान्त की आवश्यक शर्तें बताइए।
उत्तर- जॉन रॉल्स के अनुसार न्याय सिद्धान्त की आवश्यक शर्तें निम्नलिखित हैं- 1. न्याय संगत संविधान, 2. राजनीतिक प्रक्रिया का उचित रूप से संचालन, 3. अवसर की समानता, न्यूनतम सामाजिक आवश्यकताओं की गारंटी।
प्रश्न 49. अमर्त्य सेन के अनुसार न्याय क्या है?
उत्तर- अमर्त्य सेन के अनुसार न्याय केवल वितरण और निष्पक्षता तक सीमित नहीं होना चाहिए, जैसा कि कई पारंपरिक सिद्धान्त सुझाते हैं। इसके बजाय, वह न्याय की अधिक विस्तृत समझ का प्रस्ताव करता है जिसमें क्षमताओं, स्वतंत्रता और संस्थानों की कार्यप्रणाली सहित कई आयाम शामिल हैं।
प्रश्न 50. ओकशॉट के राजनीतिक दर्शन के क्या कार्य हैं?
उत्तर- ओकशॉट के अनुसार, "मनुष्य की प्रकृति और सांसारिक नियति का अन्वेषण, समकालीन सभ्यता का आलोचनात्मक विश्लेषण और विवेचन ही ओकशॉट के राजनीतिक दर्शन के कार्य हैं।"
प्रश्न 51.ओकशॉट के स्वतन्त्रता सम्बन्धी विचारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर- ओकशॉट स्वतंत्रता का पुजारी है, वह स्वतंत्रता को बर्फ की तरह आत्मसंयम और धैर्य की देन नहीं मानता, बल्कि समकालीन परिस्थितियों में व्यक्ति के खोए हुए अस्तित्व को ढूंढ़ निकालने के लिए आतुर है।
प्रश्न 52. ओकशॉट के अनुसार साहचर्य निर्माण के कितने तरीके हैं?
उत्तर- ओकशॉट के अनुसार साहचर्य निर्माण के तरीके निम्न हैं- (i) उद्यममूलक साहचर्य जो व्यवहार-कुशलता पर आधारित है और अपने सदस्यों के किसी ठोस उद्देश्य की पूर्ति के लिए बनाये जाते हैं। (ii) नैतिक साहचर्य जो अपने आपमें साध्य होते हैं।
