जलवायु संरक्षण | अनुकूलन और शमन क्या है | UPSC Model Question Answer | जलवायु आपदाओं से निपटने के लिए अनुकूलन | IAS model Question | Current Affairs | UPSC Current Affairs | IAS Current Affairs

 प्रश्न -जलवायु संरक्षण के संदर्भ में अनुकूलन और शमन क्या है?आने वाले भविष्य में जलवायु आपदाओं से निपटने के लिए अनुकूलन के महत्व को उचित ठहराएं।

उत्तर-हाल ही में प्रकाशित इमिशन गैप रिपोर्ट 2022 के अनुसार पूर्व औद्योगिक करण युग की तुलना में इस सदी के अंत तक दुनिया 2.6 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो जाएगी, आज हमारी पृथ्वी 1.1 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक गर्म है हम इसके हानिकारक प्रभावों का अनुभव कर सकते हैं उदाहरण के रूप में पाकिस्तान में बाढ़ इथोपिया में सूखा कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया में जंगल की आग इत्यादि चरम मौसमी घटनाओं का उल्लेख हम कर सकते हैं। पता हम यह स्वाभाविक रूप से कह सकते हैं कि आने वाले वर्षों में और भी भयानक जलवायु घटनाएं होंगी जैसे तूफान गर्मी की लहरें समुद्र के पानी के घर में से प्रेरित विस्तार और ध्रुवी और हिमनद बर्फ के पिघलने के गानों समुद्र के स्तर में वृद्धि हो सकती है इसी के साथ-साथ तमाम प्रकार के रोग लोगों का विस्थापन पानी की कमी और परिचर सामाजिक तनाव भी आने वाले समय में दिखाई पड़ सकते हैं। ऐसी स्थिति में नीति निर्माताओं को जलवायु से संबंधित घटनाओं से निपटने के लिए दो प्रमुख बिंदु पर प्रकाश डालना अनिवार्य हो जाता है पहला अनुकूलन दूसरा शमन।

•अनुकूलन ----

यह जलवायु परिवर्तन के वर्तमान और भविष्य के प्रभावों को समायोजित करने की प्रक्रिया होती है। इसके अंतर्गत प्रमुख उपायों में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे में बदलाव शामिल है जैसे समुद्र के स्तर में वृद्धि से बचने के लिए निर्माण व्यवहार में बदलाव जैसे कि व्यक्ति अपने भोजन की बर्बादी को कम करें तमाम प्रकार के भौतिक साधनों का कम से कम प्रयोग करें जिससे कार्बन उत्सर्जन कम से कम होगा। •शमन---- न्यूनीकरण या शमन का अर्थ है कि वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को रोकने या कम कर के जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम गंभीर बनाना या प्रमुख रूप से भविष्य के लिए उठाए गए कदम होते हैं। इसके अंतर्गत उठाए गए प्रमुख कदम जैसे कि नवीकरणीय ऊर्जा, जंगलों के आकार में वृद्धि करना इत्यादि।

•जलवायु आपदाओं से निपटने के लिए अनुकूलन का महत्व----

चेहरा मौसमी घटनाओं या आपदाओं से निपटने के लिए अनुकूलन के अंतर्गत प्रमुख रूप से उठाए जा सकने वाले कदम- (१) तू पानी पानी की नालियों का निर्माण करना। (२) बड़ी संख्या में लोगों के रहने के लिए आश्रय स्थलों का निर्माण करना ‌ (३) जंगल की आग से लड़ने के लिए अधिकारियों को सिस्टम के साथ तैयार करना। (४) जल निकायों का ऐसा निर्माण करना जो तूफान को स्टोर कर सकें। (५) निकासी योजनाओं के साथ अत्याधुनिक मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को विकसित करना। (६) जलवायु के अनुकूल कृषि की दिशा में काम करने की आवश्यकता है जैसे कि प्राकृतिक कृषि। (७) तटरेखा में औद्योगिक गतिविधियों पर रोक लगाने की आज सख्त जरूरत है। अतः उपरोक्त कथनों के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि अनुकूलन क्षेत्रीय जलवायु संबंधित घटनाओं के लिए सबसे उचित साधन है लेकिन वैश्विक स्तर पर हमें समय की प्रक्रिया को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
AKASH BIND

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