banko ka mayajaal full book pdf 3rd Part by Akash Bind( Bankon Ka Mayajaal Hindi PDF Book by Ravi Kohad Download)

 


banko ka mayajaal full book pdf by Akash Bind( Bankon Ka Mayajaal Hindi PDF Book by Ravi Kohad Download)

Bankon Ka Mayajaal Hindi PDF Book by Ravi Kohad। इस पुस्तक में बैंको के मायाजाल के बारे में वर्णन किया गया हैं। इस पुस्तक का नाम "बैंको का मायाजाल" हैं। इस पुस्तक के लेखक "रवि कोहाड़" हैं।  इस पुस्तक को "युवा क्रांति" ने प्रकाशित किया हैं।

                                    विश्व नियंत्रण का इतिहास  

                                              मनी चेंजर की मदद से आगे बढ़कर विलियम तृत्तीय 





    1677 में राजकुमारी मैरी से विवाह करके 1689 में इंग्लैंड का राजा बन गया । कुछ ही दिनों बाद फ्रांस से युद्ध हुआ और उसने मनी चेंजर्स से 1.2 मिलियन ( 12 लाख ) पाउंड उधार माँगे । उसे निम्नलिखित शर्तों के साथ सिर्फ ब्याज वापस देना था मूल नहीं : ( 1 ) मनी चेंजर्स को इंग्लैंड के पैसे छापने के लिए एक केन्द्रीय बैंक ' बैंक ऑफ इंग्लैंड ' की स्थापना की अनुमति । ( 2 ) सरकार खुद पैसे नहीं छापेगी और बैंक सरकार को भी 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से कर्ज देगा , जिसे चुकाने की गारंटी के लिए सरकार लोगों पर टैक्स लगाएगी । सरकार के इस ऋण चुकाने के वायदे को बांड कहा जाता है ।


    बैंक ऑफ इंग्लैंड को सभी केन्द्रीय बैंकों की “ माँ ” कहा गया है जिसकी स्थापना 1694 में हुई ।


    बैंकिग किंग रोथशिल्ड परिवार की कहानी

    1694 में ' बैंक ऑफ इंग्लैंड ' की स्थापना कुछ और लोगों ने की परन्तु बाद में रोयशिल्ड परिवार का उस पर नियंत्रण हो गया । जर्मनी में 1714 में एमोल रोथशिल्ड का जन्म हुआ जिसे बैंकिंग किंग भी कहा जाता है ।


    उसके 5 बेटे जन्मे और उसने पाँचों को अलग - अलग देशों के आर्थिक साम्राज्य को खड़ा करने के लिए भेजा । एमशेल ने 1 मई 1776 को कुछ लोगों के साथ मिलकर इल्यूमिलिटी ( जागृत या प्रबुद्ध ) नामक एक गुप्त संस्था बनाई । इन लोगों को लगता था कि दुनिया के सभी व्यक्ति भेड़ - बकरी की तरह हैं और ईश्वर ने इन्हें सब पर शासन करने के लिए भेजा है उसका तीसरा बेटा नैवन रोथशिल्ड ( 1777-1836 ) बहुत शातिर था जिसे उसने इंग्लैंड में भेज दिया था । सन् 1815 में जब नेपोलियन और इंग्लैंड के बीच युद्ध हुआ तब उसके पास ' बैंक ऑफ इंग्लैंड ' के कुछ ही शेयर थे अपने गुप्तचरों से उसे एक दिन पहले सूचना मिल गई थी कि नेपोलियन हार गया है । उसका दिमाग चला और उसने शेयर बाजार में अफवाह फैला दी कि इंग्लैंड युद्ध में हार गया है सबको यकीन दिलाने के लिए नैथन ने अपने आपको निराश दिखाते हुए अपने ' बैंक ऑफ इंग्लैंड के शेयर बेचने शुरू कर दिए । अगर सच में इंग्लैंड हार जाता तो ' बैंक ऑफ इंग्लैंड के शेवर की कीमत कुछ भी नहीं रह जाती । इस भय और अविश्वास के माहौल में फैली अफवाह से लोगों को उसकी बात पर यकीन हो गया और देखते ही देखते ' बैंक ऑफ इंग्लैंड ' के सभी शेयरधारकों ने अपने सभी शेयर बेचने शुरू कर दिए । इससे करोड़ों अरबों के शेयर कौडियों के भाव में आ गए , जिसे नैथन ने गुपचुप तरीके से अपने लोगों द्वारा खरीदवा लिया । इस तरह एक अफवाह से , बिना कोई खास कीमत चुकाए वह एक दिन में ही बैंक ऑफ इंग्लैंड ' का मालिक बन गया । जब लोगों को पता लगा कि दरअसल नेपोलियन हार गया था , तो उनके पास सर पीटने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था
    नैधन रोथशिल्ड कहता है , “ अगर देश के पैसे नियंत्रित और जारी करने का अधिकार मुझे दे दो तो मुझे फर्क नहीं पड़ता कि देश के कानून कीन बनाता है । " 1820 में अपने ऊपर गर्व करते हुए रोथशिल्ड कहता है “ मुझे परवाह नहीं है कि किस कठपुतली को उस इंग्लैंड के सिंहासन पर बैठाया गया है जिसका सूर्य कभी अस्त नहीं होता । ब्रिटेन के पैसे की मात्रा ' ( money supply ) को जो आदमी नियंत्रित करता है , ब्रिटिश साम्राज्य को भी नियंत्रित करता है और मैं ब्रिटेन के पैसे की मात्रा को नियंत्रित करता हूँ । "


     इस तरह से पूरी दुनिया से हर वर्ष करोड़ों - करोड़ रुपए गई इस एक वैकिंग परिवार की सम्पति का आकलन लूटकर जुटाई 500 ट्रिलियन डॉलर लगाया गया है । अगर इस रकम का अन्दाज़ा लगाना हो कि यह कितनी है , तो समझ लीजिए की पूरी दुनिया के 700 करोड़ लोग मिलकर एक वर्ष में सिर्फ 75 ट्रिलियन डॉलर की सम्पति पैदा करते हैं । इसे अगर रुपए में बदल दिया जाए तो यह सम्पति 30,00,00,00,00,00,00,000 रुपए की बनती है । जिसमें से अगर हर सैकंड खाते - पीते , सोते - जागते । करोड़ खर्च करें ... तो इसे खर्च करने में 95 साल लगेंगे । एमशेल रोथशिल्ड ने अपनी वसीयत में यह साफ - साफ लिखा था कि परिवार की सम्पति बंटेगी नहीं और परिवार का मुखिया ही इसे नियंत्रित करेगा । इस समय ऐवलिन रोथशिल्ड इस परिवार का मुखिया है । एक तरह से दुनिया का असली शासक रोथशिल्ड परिवार है ।


    अमेरिका की कहानी

    1729 में बेंजामिन फ्रेंकलिन एक नौजवान था और अपनी प्रिंटिंग प्रेस चलाता था । उस समय उसने अपने अखबार में एक लेख लिखा कि अमेरिका के लोगों को बिना सोना - चाँदी के आधार पर कागज़ के कर्ज मुक्त नोट बना लेने चाहिए । लोगों को यह लेख बहुत पसन्द आया और सच में अमेरिका में कागज़ के पैसे बनने लगे । पैसे की मात्रा बढ़ने से अमेरिका में एकाएक समृद्धि आ गई ।


    इस बात से इंग्लैंड में बैठे बैंकरों को अपना साम्राज्य खतरे में दिखाई दिया और उन्होंने 1751 में इंग्लैंड के राजा जॉर्ज द्वितीय , जिसकी गुलामी में अमेरिका जी रहा था , पर दबाव बनाकर इस तरह के और अधिक पैसे जारी करने पर प्रतिबन्ध लगा दिया । जिससे अमेरिका की समृद्धि का रास्ता बन्द हो गया । 1764 में इंग्लैंड में एक और कानून बनने वाला था कि पहले से जारी किए गए कागज़ के नोट भी बन्द कर दिए जाएँ । इस कानून को रुकवाने के लिए जब बेंजामिन फ्रेंकलिन राजा जॉर्ज तृतीय से बात करने लन्दन गए तो उनकी मुलाकात बैंक ऑफ इंग्लैंड के निदेशक से हुई । फ्रेंकलिन ने लन्दन में वेरोजगारी , गरीबी और अमीरों पर अत्यधिक टैक्स देखा तो निदेशक ने बताया कि यहाँ मज़दूर ज़्यादा हैं । यह जबाव फ्रेंकलिन को अटपटा लगा । बैंक ऑफ इंग्लैंड के निदेशक द्वारा अमेरीका के गरीबों का हालचाल पूछने पर फ्रेंकलिन ने जवाब दिया कि हमारे यहाँ गरीब है ही नहीं , क्योंकि हम अपने पसे खुद बनाते हैं आर उसे इतनी मात्रा में बनाते हैं कि चीजें आसानी से उत्पादक से ग्राहक तक पहुँच जाती हैं । इस तरह स्वयं का पैसा बनाकर हम ना सिर्फ उनकी क्रय शक्ति ( purchasing power ) तय करते हैं बल्कि हमें कोई ब्याज भी नहीं चुकाना पड़ता ।


    आजादी की लड़ाई(1776)



    फ्रैंकलिन के बातचीत करने के बावजूद इंग्लैंड के बैंकरों के दबाव में अमेरिका में कानून बनाकर कागज़ के पैसों पर रोक लगा दी गई । इससे अमेरिका में एकाएक गरीबी और बेरोज़गारी बढ़ गई और मन्दी का दौर आ गया । जिससे परेशान होकर अमेरिका के किसानों ने विद्रोह कर दिया । कई लोगों ने लिखा है कि अमेरीका की आजादी की लडाई के पीछे एक मुख्य कारण यह था कि राजा ने उनके पैसे बनाने की आज़ादी पर रोक लगाकर उन्हें गरीब बना दिया था । युद्ध के दौरान भी अमेरिका ने कॉन्टीनेंटल नाम की कागज़ी मुद्रा जारी की और ताकतवर हो गए , जिससे वे इंग्लैंड से जीत गए और आज़ाद हो गए । परन्तु बाद में बैंकर्स ने उसके जैसे दिखने वाले नकली नोट बनाकर इसे व्यर्थ साबित कर दिया । अमेरिका के राष्ट्रपति रहे थॉमस जेफरसन के अनुमान से 200 मिलियन डॉलर की कॉन्टीनेंटल मुद्रा में लगभग इतना ही नकली पैसा बनाकर इसकी मात्रा दुगनी कर इसकी कीमत गिरा दी गई थी।                                                   


                                                                    Price₹15843.00

      अमेरिका के शुरुआती केंद्रीय बैंक

    प्रथम केन्द्रीय बैंक ( 1791-1811 ) कॉन्टीनेंटल मुद्रा षड्यंत्रकारी तरीके से व्यर्थ साबित करने के बाद इन लोगों ने अमेरिका के नेताओं को समझाया कि अपना खुद का पैसा बनाने से काम नहीं चलेगा और अमेरिका में भी बैंक ऑफ इंग्लैंड जैसा एक केन्द्रीय बैंक स्थापित करने की सलाह दी अमेरिका के प्रथम केन्द्रीय बैंक की स्थापना 20 साल के चार्टर पर 1791 में हुई । थॉमस जेफरसन 1801 में अमेरिका का राष्ट्रपति बने और वे 1809 तक राष्ट्रपति रहे । उसने इस व्यवस्था को समझ लिया और केन्द्रीय बैंक को बन्द करवाने के लिए पुरज़ोर ताकत लगा दी । परन्तु 20 साल का चार्टर होने के कारण यह 1811 तक चला । जेफरसन कहते हैं , “ अगर अमेरिका के लोग बैंकों के माध्यम से पैसे का नियंत्रण होने देंगे तो बैंक और उनके आसपास विकसित कार्पोरेशन पहले महँगाई से फिर उसके बाद मन्दी से लोगों को उनकी सभी सम्पत्ति से वंचित कर देंगे , जब तक उनके बच्चे उनके पिता के कब्जे वाले महाद्वीप पर बेघर न उठे । ”



     एक बयान में वे कहते हैं कि मेरा मानना है कि बैंकिंग संस्थाएँ हमारी स्वतंत्रता के लिए दुश्मन की सेनाओं से भी बड़ा खतरा है । मुद्रा जारी करने का अधिकार बैंकों से छीनकर लोगों को दे देना चाहिए जिसके वे सच्चे अधिकारी हैं । एक और अन्य बयान में वे कहते हैं कि काश संविधान में सिर्फ एक बदलाव करना सम्भव हो - केन्द्र सरकार से पैसे उधार लेने की शक्ति छीन लेना ।

       

    द्वितीय केंद्रीय बैंक और राष्ट्रपति जैक्सन पर हमला


    किन्त 5 वर्ष पश्चात ही 1816 में बैंकर्स अपना द्वितीय केन्द्रीय बैंक स्थापित करने में सफल हो गए । इसे भी 20 साल का चार्टर मिला । 1829 में एन्ड्रयु जैक्सन यह घोषित करते हुए राष्ट्रपति बने कि वे केन्द्रीय बैंक को समाप्त कर देंगे । बैंकर्स ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की कि उन्हें राष्ट्रपति ना बनने दिया जाए परन्तु वे एक बार नहीं दो बार राष्ट्रपति बने । 1836 में बैंक का चार्टर समाप्त होने वाला था और जैक्सन ने उसे आगे बढ़ाने से मना कर दिया । जैक्सन लिखते हैं , “ अगर अमेरिका के लोग मात्र मुद्रा और बैंकिंग व्यवस्था के अन्याय को समझ पाते तो कल सुबह होने से पहले क्रान्ति हो जाएगी । ”



     जैक्सन को 2 बार मारने की कोशिश हुई पर वह बच गया । जनवरी 1835 में आखिरी बार अमेरिका अपना कर्ज चुकाकर कर्ज मुक्त हुआ और द्वितीय बैंक का अन्त हुआ ।


    अब्राहम लिंकन का करिश्मा और हत्या(1863-65)

    27 वर्ष की गुप्त योजना के बाद बैंकर्स सक्रिय हुए और श्वेता और अजुनी के बीच गृहयुद्ध छिड़ गया । लड़ाई जीतने के लिए सेना को धन चाहिए था या सरकार के पास पैसों की कमी थी । जब अब्राहम लिकन इन बकस क पास को मांगने गए तो उन्हें 24 से 36 प्रतिशत व्याज अदा करने को कहा गया । निराश होका लिंकन वापस आ गए । अगर युदनहीं लड़ते तो अमेरिका के दो टुकड़े हो जाते और अगर कर्ज लेकर लड़ते तो कर्ज के बोझ तले दब जाते । 


    राष्ट्रपति लिंकन के सामने एक धर्मसंकट आ गया उनके सचिव ने इस निराशा का कारण जानकर पूछा कि आप स्वयं का पैसा क्यों नहीं छापते लिंकन ने पूछा , " क्या हम सच में छाप सकते हैं ? जवाब मिला , " किसने मना किया है । " तुरन्त लिंकन ने 500 मिलियन डॉलर छापे । जिनके पीछे का रंग हरा होने के कारण उनको ' ग्रीन बैक ' कहा गया । लिंकन युद्ध जीत गए । इस बात से विश्व में खलबली मच गई । लन्दन टाइम्स में 1865 में लेख आया कि अगर उत्तरी अमेरिका की यह शरारती वित्तीय नीति स्थिरता के निष्कर्ष तक पहुँच जाती है तो सरकार बिना लागत के अपने खुद के पैसे बनाएगी । वो अपना सारा कर्ज चुका देगी और ऋणमुक्त हो जाएगी । अपना कारोबार चलाने के लिए इसके पास खूब पैसा होगा । यह दुनिया के सभ्य सरकारों के इतिहास में मिसाल से परे समृद्ध हो जाएगी । सभी देशों का धन और दिमाग अमेरिका चला जाएगा । यही कारण है कि इस सरकार को नष्ट कर दिया जाना चाहिए , नहीं तो यह दुनिया की हर राजशाही को नष्ट कर देगी । 1865 में ही लिंकन की हत्या हो गई ।

      राष्ट्रपति गारफील्ड की हत्याकांड(1881)

    1881 में जेम्स गारफील्ड अमेरीका के राष्ट्रपति बने और वे साहसपूर्वक बैंकर्स के खिलाफ खड़े हुए । इसी कारण उनकी हत्या हो गई । एक बयान में वे कहते हैं कि , " जिस किसी ने भी देश में पैसे की मात्रा को नियंत्रित किया है , वह सभी उद्योग और वाणिज्य का पूर्ण स्वामी बन गया है । जब आप पाएँगे कि पूरा सिस्टम शीर्ष पर बैठे कुछ शक्तिशाली लोगों द्वारा बहुत आसानी से नियंत्रित किया जाता है तो महँगाई और मन्दी क्यों आती हैं बताने की ज़रूरत नहीं रहेगी । " राष्ट्रपति बनने के चार महीने के अन्दर ही उनकी हत्या हो गई । मन्दी गहरा गई , जनता बेरोज़गारी , गरीबी और भुखमरी के दलदल में फँस गई । में फसलें खेत में सड़ने के लिए छोड़ दी गई क्योंकि ना तो मज़दूरों को देने के लिए पैसा था और न ही खरीदने के लिए बाज़ार में कोई ग्राहक था । देश में सब कुछ होते हुए भी गरीबी थी क्योंकि व्यापार का चक्का चलाने के लिए पैसे की कमी थी । 


    देश को पैसे की बहुत ज़रूरत थी , पर बैंकरों ने दबाव बनाया कि सरकार खुद के पैसे छाप लेगी तो महँगाई और बढ़ जाएगी

     बड़े खेल की शुरुआत

    बैंकरों द्वारा अमेरिका में एक बार फिर से केन्द्रीय बैंक बनाने की कोशिशें तेज़ी से शुरू हुई । 1907 में अफवाह फैलाई गई कि कुछ बैंक फेल हो गए हैं , जिससे लोगों ने अपना पैसा निकलवाना शुरू कर दिया और सच में ही बैंक फेल होना शुरू हो गए । समाधान के रूप में बैंकर्स ने सरकार को एक केन्द्रीय बैंक बनाने का सुझाव दिया और 1910 में जैकल द्वीप पर बैंकर्स ने एक खुफिया बैठक करके एक कानून की रूपरेखा बनाई जिसे अमेरिका की संसद में पास कराना था ।


    फेडरल रिजर्व एक्ट,1913

    बुड्रो विल्सन को राष्ट्रपति पद कि लिए चुनाव में आर्थिक मदद के बदले फेडरल रिज़र्व एक्ट ( Federal Reserve Act ) नाम का कानून पास करने को कहा गया । नाम में ' फेडरल ' शब्द भ्रमित करने के लिए रखा गया ताकि जनता को लगे कि इसका सम्बन्ध केन्द्र सरकार से है । 23 दिसम्बर 1913 को जब अधिकतर लोग क्रिसमस की छुट्टियों में व्यस्त थे , सरकार ने अमेरीका की गुलामी का यह कानून पास कर दिया । बाद में विल्सन ने पश्चाताप में लिखा , " हमारा महान औद्योगिक राष्ट्र क्रेडिट की प्रणाली द्वारा नियंत्रित किया जाता है । क्रेडिट की हमारी प्रणाली निजी तौर पर केन्द्रित है । इसलिए , देश का विकास और हमारी सभी गतिविधियाँ कुछ लोगों के हाथों में केन्द्रित हैं । हम लोग सभ्य दुनिया में सबसे बुरी तरह से शासित और नियंत्रित सरकारों में से एक बन गए हैं । अब सरकार मुक्त और लोकतांत्रिक होने की बजाय एक छोटे से दबंग समूह के नियंत्रण में हो चली है । " 




    AKASH BIND

    I am a educational youtuber & blogger.

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