वर्तमानकाल में वाह-वाही और खुद को गण्यमान्य(विशिष्ट या समझदार) प्रदर्शित करने के लिए लोग ब्रांडेड नामक शब्द को अपनी जीवनशैली में इस तरह उतार लिये हैं मानो इसके बिना आपका कोई अस्तित्व या औचित्य ही ना हो। फिलहाल हम बात करने वाले हैं आज नमक के बारे में। इसका सबसे प्रसिद्ध ब्रांड है-टाटा नमक। खैर जो कोई भी कंपनी आयोडीनयुक्त नमक की बात कहकर बाजार में लोंगो से पैसा वसूल कर रही है असल वो एक जहरयुक्त नमक है, मैं अपनी बात ऐसे ही हवा में ना कहकर रिपोर्ट में कही गई बातों को बताता हुं-- आयोडीनयुक्त नमक जो बनाया जाता है वह समुद्री नमक से बनाया जाता है जबकि हमारे वैदिक शास्त्रों में समुद्र जल को निषेध व जहर बताया गया है और ऊपर से ये विदेशी कंपनियां मानव निर्मित रसायन को डालकर उसे और भी ज्यादा खतरनाक बना देती हैं। डब्ल्यू. एच.ओ के 2007 की एक रिपोर्ट में ये बात सामने आई कि आयोडीनयुक्त नमक को कई प्रकार के हानिकारक रसायन मिलाकर समुद्री नमक से तैयार किया जाता है और फ्री फ्लो गुण पैदा करने के लिए अतिरिक्त रूप से दो अन्य खतरनाक तत्वों को मिलाया जाता है जिससे स्वाद में काफी अंतर देखने को मिलता है। आज विश्व में कुल 56 देशों में इस आयोडीनयुक्त नमक को बैन कर दिया गया है परंतु बड़े शर्मिंदगी की बात ये है कि आज के समय में भारत जैसे विकासशील देश में खूब धड़ल्ले से सरकार आयोडीनयुक्त नमक को अपनें नागरिकों को खिलवा रही है। हमें अपने वैदिक शास्त्रों को फिर से समझने और उस पर शोध करने की आवश्यकता है,जो बातें आज की शिक्षा या विज्ञान बताता है व़ सारी बातें हमारे ऋषियों नें करोड़ों-अरबों साल पहले बताकर चले गये हैं आप सभी पाठकों को हैरानी होगी कि अल्जीरिया,कोलंबिया, चीन,डेनमार्क जैसे देशों में साथ ही कई लैटिन अमेरिकी देशों में नमक का यूज बिल्कुल नहीं होता है। एफ.ए.ओ. और यूनिसेफ के परिक्षणों में वहां के निवासी बिल्कुल स्वस्थ पाए गए हैं।
अब बात आती है कि कौन से नमक को खाया जाए-प्राकृतिक नमक ही सबसे अच्छा नमक माना गया है।
ये जानकारी दैनिक जागरण के अखबार का कुछ अंश है।
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