आज दुनिया जिस कोरोना नामक भयंकर संक्रमण से लड़ रही है। इस स्थिति में हम मानवता और नैतिकता को सही तरीके से परख सकते हैं। ऐसे समय में धर्म के मायने को भी समझना और समझाना अपरिहार्य हो जाता है। यदि बात धर्म की, की जाए तो धर्म का अर्थ ही होता है- कर्तव्य। ऐसा कर्तव्य जो देश काल और स्थिति के अनुकूल हो। कुछ लोग तो इस बात से वाकिफ हैं,लेकिन वहीं कुछ मुठ्ठीभर लोग रुढ़िबद्ध और पूर्वाग्रह से संक्रमित हैं। ऐसे समय में इन मुठ्ठीभर लोगों को समझना होगा कि हमारी नैतिकता ही सर्वश्रेष्ठ और सर्वोपरी होनी चाहिए। विश्व का कोई भी धर्म या संप्रदाय मानवता के विपरीत नहीं बल्कि मानव के कल्याण की ही बात करता है। अंततः सारे धर्म,संप्रदाय और पंथ का सारांश मानव के कल्याण से संबंधित उपाय सुझाते हैं। यदि आथ किसी चीज की जरूरत है,तो वो है हमारे नैतिक मूल्यों को लोगों तक पहुँचाना उन्हें प्रेरित करना। ऐसा तभी हो सकता है,जब लोगों के समक्ष महान व्यक्तियों का जीवन-परिचय और उनके कर्मों को उजागर किया जाए।