कोरोना वायरस : बिभिन्न पहलू

परिचय-लक्षण और बचाव
प्रकोप-
प्रभाव-नकारात्मक एवं सकारात्मक: भारत और विश्व
सारांश-
                                   परिचय
       
वर्तमान समय में जिस वायरस नें पूरी दुनिया को अपने प्रकोप से प्रभावित किया है, ये कोरोना वायरस परिवार का एक नया वायरस है जिसका नाम डब्ल्यू.एच.ओ. ने नोवेल कोरोना (ncov)वायरस बताया है। इस वायरस से होने वाली बिमारी का आधिकारिक नाम कोविड-19 है। अर्थात नोवेल कोरोना वायरस से होने वाली बिमारी कोविड-19 है।
इस बिमारी को मनुष्यों इसके पहले कभी नहीं देखा गया था। यह एक नया स्ट्रेन है। विभिन्न स्रोतों और जानकारों के माध्यम से यह पता चला है कि चीन के बायो लैब में चमगादड़ पर प्रयोग करते समय सबसे पहले फैला। वहीं अन्य सूत्रों के मुताबिक चीन के वुहान के
हुआनन सीफूड होलसेल मार्केट में पहली बार देखा गया। कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं कि यह वायरस चीन से ही फैला है। कोरोना नाम इंग्लिश के क्राउन शब्द पर पड़ा है जिसका अर्थ होता है मुकुट माइक्रोस्कोप से देखने पर यह वायरस मुकुट की तरह दिखता है। इसलिए इसे कोरोना नाम दिया गया।
                             ★कोविड-19 के लक्षण★
साधारणतः इसके लक्षण सामने आने में लगभग एक सफ्ताह या 14 दिन लगते हैं। इसमें बुखार से शुरु होकर सूखी खांसी,थकान,और फिर असामान्य लक्षण सिर दर्द,बंद नाक,गले में खराश,थूक के साथ खांसी,सांस लेने में दिक्कत,मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द,ठण्ड लगना मतली आना शुरू हो जाता है। इसकी गंभीरता होने पर निमोनिया,सार्स,खांसी के साथ खून आना,डब्ल्यू.बी.सी. में कमी,किडनी का खराब होना और मृत्यु भी हो जाती है।
                        ★कोविड-19 का प्रकोप★               
सर्वप्रथम इसका प्रकोप चीन के वुहान शहर में निमोनिया रोग के रूप मे देखा गया। चीन से ही विश्व के लगभग सभी देशों में इस समय इसका प्रकोप देखा जा रहा है। विभिन्न देशों से चीन आये प्रवासियों में कोविड-19 संक्रमण हुआ,फिर धीरे-धीरे ये हजारों और लाखों की संख्या में लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। चीन में आये विभिन्न देशों से प्रवाशियों द्वारा उनके चीन से पलायन कर अपने-अपने देश में जाने के कारण वहां पर भी कोरोना वायरस एक श्रृखंला के रूप में फैलने लगा,जिसके कारण विश्व के लगभग सभी देशों में इस समय इसका प्रकोप देखा जा रहा है। यूरोप,अमेरिका,एशिया और अफ्रिका सहित लगभग सभी महाद्विपों में इसका संक्रमण फैल चुका है। इसी को देखते हुए डब्ल्यू.एच.ओ. ने इसे महामारी घोषित कर दिया। भारत में सर्वप्रथम दक्षिण में केरल के एक क्षात्रा में इसका संक्रमण देखा गया था। ये छात्रा भी चीन से आयी थी। यदि विश्व में इसके संक्रमण की बात की जाए तो इस समय(5मई2020) 3609958 केस सामने आ चुके हैं। इनमें मरने वालों की संख्या 250097 है, हालांकि इसमें से 1170397 लोग स्वस्थ भी हुए हैं। अगर भारत की बात की जाए तो यहां पर अब तक कुल 43741 केस मतलब 50हजार लगभग केस सामने आये जिसमें मरने वालों की संख्या 1145 है। हालांकि 11762 लोग स्वस्थ भी हुए हैं।
                    कोविड-19के नकारात्मक प्रभाव
★वैश्विक आर्थिक प्रभाव।
★सामाजिक प्रभाव।
★धार्मिक प्रभाव।
★राजनैतिक प्रभाव।
★खेल जगत में प्रभाव।
★फिल्म इंडिस्ट्री में प्रभाव।
उपर्युक्त बिंदुओं में सबसे ज्यादा नकारात्मक प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। आयात-निर्यात पर रोक लग जाने के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। यदि हम भारत के परिप्रेक्ष्य में बात की जाए तो भारत का कुल इलेक्ट्रानिक आयात यानी लगभग45% चीन निर्भर है। लगभग एक तिहाई मशीनरी और लगभग दो तिहाई कार्बनिक रसायन जिन्हें भारत दुनिया से खरीदता है,चीन से आते हैं। मोटर वाहन और उर्वरकों के लिए चीन की हिस्सेदारी25%है। लगभग 65-70% ए. पी. आई.(ऐक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट) और लगभग 90% मोबाइल फोन चीन से भारत में आते हैं। इसलिए चीन पर निर्भर भारतीय उद्दोग पर काफी हद तक असर पड़ा है,जो भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। इसी तरह टेक्सटाइल,आटोमोबाइल और कई दीर्घ और लघु उद्दोग भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं।
सामाजिक प्रभाव में कोरोना वायरस ने काफी कुछ प्रभावित कर नये बदलाव से सामाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पूरे विश्व के साथ भारत भी कई सामाजिक अटकलों- समारोह, शादी-विवाह में हस्तक्षेप,रोजयर्रा के लिए आने वाली चीजों पर प्रभाव। बाजार में रोजमर्रा के सामान ना मिलना या महंगे दामों पर मिलना। इस तरह कोरोना वायरस हमारे दैनिक गतिविधियों को भी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रहा है।
अब यदि धार्मिक प्रभाल की बात की जाए तो लाकडाउन और सामाजिक दूरी बनाए रखने के कारण धार्मिक स्थल भी प्रभावित हुए हैं। मंदिर,मस्जिद,चर्च,गुरूद्वारे सभी धार्मिक स्थलों को बंद रखा गया है। धार्मिक यात्रा ठप होने के कारण कहीं ना कहीं हमारी अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करता है।
उपर्युक्त प्रभावों के साथ-साथ राजनैतिक प्रभाव भी देखने को मिलता है। विभिन्न प्रकार के सम्मेलन जो होने वाले थे। उन पर भी प्रभाव पड़ा है। कई सम्मेलनों को रद्द कर दिया गया है या फिर विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सम्मेलन किए जा रहे हैं। जिसके कारण देश मित्रता और समझौतों पर खासा प्रभाव पड़ा है। आशा जताई जा रही है कि आने वाले समय में सालों पीछे जाने को मजबूर हैं विश्व के तमाम देश ज्यादातर विकासशील देशों पर प्रभाव पड़ेगा।
अब अगर खेल जगत की तरफ हम थोड़ा रुख करें तो ये पता चलता है कि विभिन्न देशों में होने वाले विभिन्न मैच का आयोजन जो होना था उसे भी अनिश्चित काल के लिए रोक दिया गया है। वो चाहे जापान द्वारा ओलंपिक आयोजन,अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक,पैरालंपिक,हाकी,क्रिकेट,बालीबाल या अन्य कोई भी खेल हो सबको पोस्पोंड कर दिया गया है। जिसके कारण संबंधित राष्ट्र को आर्थिक प्रभाव झेलनी पड़ी है।
कोरोना वायरस फिल्म जगत को भी काफी हद तक प्रभावित किया है। विभिन्न फिल्मों की शूटिंग को रोकना,या होने वाली शूट़िग को पोस्पोंड कर देना,फिल्मों के रीलीज डेट को रोक कर रखना या बढ़ा देना। इन छोटे-छोटे कारणों से भी अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ा है।
   ★कोरोना वायरस से लाकडाउन से सकारात्मक प्रभाव★

एक बहुत पूरानी कहावत है कि हर दुःख के बाद सुख आता है। हर एक चीज के दो पहलू अवश्य होते हैं जैसे यदि रात होती है तो दिन भी होता है। ठीक इसी तरह कोरोना वायरस के भी काफी कुछ सकारात्मक प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिलते हैं। भले ही इसे लोग नजर अन्दाज कर दें लेकिन बदलाव प्रकृति में हुई है वो आने वाले समय के लिए बहुत ही जरुरी था। सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव पर्यावरण में देखा जा सकता है। कोरोना वायरस के कारण दिल्ली-मुम्बईजैसे मेट्रो शहरों समेत पूरे देश में लाकडाउन है। जिसके कारण तमाम फैक्ट्रियाँ,यातायात संसाधन बंद हैं,इसी कारण वायुमण्डल में काफी सुधार देखा गया है। यदि राजधानी दिल्ली की बात करें








तो एयर इंडेक्स द्वारा और प्रत्यक्ष रूप से भी यहां के आसमान को साफ-साफ देखा जा सकता है। इस तेज रफ्तार वाली मेट्रो सिटी में पंक्षियों की कलकल और रात आसमान में साफ तारों को देखना काफी सुखद और आश्चर्य करता है। ए.क्यू.आई. के अनुसार अभी और भी सुधार देखने को मिल सकता है। इसी तरह दुनिया तमाम देशों में भी प्रकृति अपने को निखारने की कोशिश करते दिख रही है। जो सरकार करोड़ों रूपये खर्च कर के भी गंगा जैसी नदियों की सफाई ना करा सकी उसे प्रकृति ने खुद ही साफ और पानी को निर्मल बना दी है। इस तरह जल प्रदूषण,वायु प्रदूषण,और ध्वनि प्रदूषण में काफी कमी देखने को मिली है।
अब सरकार पर्यावरण की इसी स्थिति को बनाए रखने के लिए विचार-विमर्श कर रही है। कोरोना वायरस लोगों को एक नये शिरे से जीने का तरीका सिखा दिया लोगों को। विशेष तौर पर तो साफ-सफाई के मामलें काफी जागरूकता आई है। कम से कम लोगों ये पता चला है कि हातों को समय-समय पर ना धोने से भी भयंकर जैसी बामारी हो सकती है।
                       ★कोविड-19 से बचाव★




हालांकि इसकी अभी कोई दवा या वैक्सीन विकसित नहीं हो पाई है। लेकिन हम अपने ही घर में क्वारंटाइन होकर साफ-सफाई का ध्यान और सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए खुद को इससे संक्रमित होने से बचा सकते हैं। अपने हाथों को समय-समय पर धोते रहना चाहिए। जिससे काफी कम हो जाती है संक्रमण होने के अवसर।
                                 ★सारांश★
अंशतः हम यह कह सकते हैं कि हमें प्राकृतिक विविधता और प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़े बिना ही अपने भौतिक या अभौतिक विकास को बढ़ाना चाहिए। जैव विविधता,मानवता,इंसानियत,प्रकृति से लगाव बढ़ाना होगा अन्यथा आज नहीं तो कल दुनिया को गर्त में जाने से कोई बचा नहीं सकता है।

AKASH BIND

I am a educational youtuber & blogger.

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