Question-"भारत को मध्य पाषाण शिला-कला न केवल उस काल के सांस्कृतिक जीवन को, बल्कि आधुनिक चित्रकला से तुलनीय परिष्कृत सौंदर्य बोध को भी, प्रतिबिंबित करती हैं।" इस टिप्पणी का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। - 2015 (250 शब्द)
Answer -मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में भीमबेटका के शिलाश्रय, गुफा तथा होशंगाबाद के आदमगढ़ के
शिलाश्रय मध्य पाषाण चित्रकला के प्रतिनिधि स्थल हैं। यहां से प्राप्त चित्रित शिलाश्रय निम्नलिखित ढंग से आधुनिक चित्रकला से तुलनीय परिष्कृत सौंदर्य बोध को प्रतिबिंबित करते हैं। यहां के शैल चित्र मुख्यतः नृत्य,संगीत,आखेट,घोड़ों और हाथियों की सवारी,आभूषणों को सजाने,शहद जमाने,बाघ,सिंह,जंगली सूअर इत्यादि को अनेक प्राकृतिक परिवेश के साथ धारण किए हुए हैं जबकि आधुनिक युग के प्रारंभ में चित्रकला कृत्रिम तथा सौंदर्य बोध की कमी से समृद्ध दिखाई पड़ती है। इसका कारण है कि चित्रकला ब्रिटिश संरक्षण में विकसित हो रही थी जिस पर उनकी भौतिकवादी सोच तथा ब्रिटिश नियम का प्रभाव था। उदाहरण के लिए कंपनी स्कूलों तथा बाजार चित्रकला में प्राकृत एवं सौंदर्य पक्षों की पूर्ण उपेक्षा की गई। पाषाण काल में उनके दैनिक जीवन के विभिन्न पक्षों जैसे लैंगिक क्रिया, बच्चे का जन्म,शवाधान तथा सामाजिक जीवन के अन्य विविध विषयों का सौंदर्यात्मक चित्रण पूर्ण प्राकृतिक परिवेश में हुआ है। हालांकि 19वीं सदी के कई आधुनिक चित्रकारों ने मध्य पाषाणिक सौंदर्य बोध तथा प्राकृतिक अवयवों को अपने चित्रकला में स्थान दिया; जैसे राजा रवि वर्मा,अमृता शेरगिल, बंगाल स्कूल के अन्य कलाकार,नंदलाल बोस,अवनींद्र नाथ टैगोर,एमएफ हुसैन की चित्रकला में भी हम इस परंपरा को देख सकते हैं क्योंकि वह यूरोपियन न्यू क्लासिकल परंपरा पर आधारित है जिसका आधार प्रकृति है।
इस प्रकार प्राचीन काल में जो मानव ने देखा उसका चित्रण किया जो अधिकतम लोगों का प्रतिनिधित्व करती है तथा भारत सरकार के पर्यटन में योगदान देकर जीडीपी में वृद्धि की भागीदार बनती है जबकि आधुनिक कला जो मानव ने सोचा उसका प्रतिनिधित्व करती है और केवल कुछ चयनित लोगों का प्रतिनिधित्व करती है मध्य पाषाण एवं आधुनिक चित्रकला में हम अधिकांशतः ऐसा संबंध देख सकते हैं।


