रिच डैड पुअर डैड रिच डैड पुअर डैड पैसों के बारे में अमीर लोग अपने बच्चों को क्या सिखाते हैं , जो ग़रीब और मध्यम वर्ग के माता - पिता नहीं सिखाते
20 साल पहले आज ... शिक्षक के रूप में जीवन आज की सहस्त्रब्दि के लोग जीवन के कठोर तथ्य सीख रहे हैं । नौकरियाँ मिलना ज़्यादा मुश्किल हो रहा है । रोबोट लाखों की तादाद में कर्मचारियों की जगह ले रहे हैं । कोशिश और ग़लती करके सीखना आज बहुत ज़्यादा महत्वपूर्ण है । पुस्तक से सीखना असल संसार में कम मूल्यवान साबित हो रहा है । अब कॉलेज की शिक्षा किसी नौकरी की कोई गारंटी नहीं देती है । “ जीवन का कैसा स्वाद ? ” मैंने पूछा , हालाँकि मैं अब भी नाराज़ था , लेकिन अब मैं जिज्ञासु और सीखने के लिए तैयार भी था । “ तुम दोनों लड़के पहले इंसान हो , जिन्होंने मुझसे पैसा बनाने की कला सीखने का आग्रह किया है । मेरे 150 से ज़्यादा कर्मचारी हैं , परंतु उनमें से एक ने भी मुझसे धन संबंधी ज्ञान नहीं माँगा । वे मुझसे नौकरी और तनख़्वाह माँगते हैं , लेकिन पैसे बनाने की कला सिखाने को कभी नहीं कहते । इसलिए ज़्यादातर लोग अपनी ज़िंदगी के सबसे बेहतरीन साल पैसे की ख़ातिर काम करने में गुज़ार देंगे और अंत तक कभी समझ ही नहीं पा - एँगे कि दरअसल वे किस चीज़ के लिए काम कर रहे हैं । " मैं बैठा - बैठा ग़ौर से सुनता रहा । “ तो जब माइक ने मुझे बताया कि तुम यह सीखना चाहते हो कि पैसा कैसे बनाया जाता है , तो मैंने ऐसा पा ठ्यक्रम बनाने का निर्णय लिया , जो असल जीवन का प्रतिबिंब हो । मैं बोलते - बोलते थक जाता , लेकिन तुम मेरी बात का मतलब कभी नहीं समझ पाते । इसलिए मैंने यह निर्णय लिया कि तुम्हें जीवन के थपेड़ों का स्वाद चखाऊँ , ताकि तुम मेरी बात सुन और समझ सको । इसीलिए मैंने तुम्हें एक घंटे के लिए सिर्फ़ 10 सेंट दिए । "
20 साल ... 20/20 दूरदर्शिता आज से 20 साल पहले बीटल्स ने 1 जून 1967 को सर्जेन्ट पेपर्स लोनली हार्ट्स क्लब बैंड एलबम रिलीज़ किया । यह तुरंत सफल हो गया ... वाणिज्यिक और आलोचनात्मक सफलता के शिखर पर पहुँच गया । यह एलबम इंग्लैंड में एलबम चार्ट के शिखर पर 27 सप्ताह रहा और अमेरिका में 15 सप्ताह तक नंबर वन रहा । टाइम मैग्ज़ीन ने सर्जेन्ट पेपर्स को ‘ संगीत की प्रगति में एक ऐतिहासिक मोड़ ' कहा था । इसने 1968 में चार ग्रैमी अवार्ड्स जीते , साथ ही एलबम ऑफ़ द इयर भी जीता - यह सम्मान पाने वाला यह पहला रॉक एलबम था । रिच डैड पुअर डैडमेरे 50 वें जन्मदिन पर 8 अप्रैल 1997 को रिलीज़ हुई थी । द बीटल्स कहानी के विप रीत यह पुस्तक तुरंत सफल नहीं हुई । ना तो वाणिज्यिक दृष्टि से , ना ही आलोचनात्मक दृष्टि से । वास्तव में , पु स्तक के प्रकाशन और इसके बाद उठे आलोचना के तूफ़ान इसके एकदम विपरीत थे । रिच डैड पुअर डैडको मूलतः स्वयं प्रकाशित किया गया था , क्योंकि हम जिस भी पुस्तक प्रकाशक के पास गए , हर एक ने मेरी पुस्तक को ठुकरा दिया । अस्वीकृति के कुछ पत्रों में इस तरह की टिप्पणियाँ थीं , “ आप यह नहीं जानते कि आप किस बारे में बात कर रहे हैं । " मैंने सीखा कि ज़्यादातर प्रकाशक मेरे अमीर डैडी के बजाय मेरे उच्च शिक्षित ग़रीब डैडी की तरह अधिक थे । ज्यादातर प्रकाशक पैसे के बारे में मेरे अमीर डैडी के सबक़ों से सहमत नहीं थे ... मेरे ग़रीब डैडी की तरह ।
समर्पण आभार 20 साल ... 20/20 दूरदर्शिता आज से 20 साल पहले प्रस्तावना रिच डैड पुअर डैड विषय - वस्तु अध्याय 1 सबक़ 1 : अमीर लोग पैसे के लिए काम नहीं करते अध्ययन सत्र अध्याय 2 सबक़ 2 : आर्थिक साक्षरता क्यों सिखाएँ अध्ययन सत्र अध्याय 3 सबक़ 3 : अपने खुद के काम पर ध्यान केंद्रित करें
अध्याय 4 सबक़ 4 : टैक्स का इतिहास और कॉर्पोरेशन्स की शक्ति अध्ययन सत्र अध्याय 5 सबक़ 5 : अमीर लोग पैसे का आविष्कार करते हैं अध्ययन सत्र अध्याय 6 सबक़ 6 : सीखने के लिए काम करें पैसे के लिए काम न करें अध्ययन सत्र अध्याय 7 बाधाओं को पार करना अध्ययन सत्र अध्याय 8 शुरुआत करना अध्ययन सत्र अध्याय 9 और ज़्यादा चाहिए , तो यह करें अध्ययन सत्र कुछ अंतिम विचार
अमीर डैडी का सबक़ : " बचत करने वाले पराजित होते हैं । " बीस साल पहले ज़्यादातर प्रकाशक अमीर डैडी के इस सबक़ से पुरज़ोर तरीक़े से असहमत थे । ग़रीब और मध्य वर्ग के लिए ‘ पैसे बचाना ' एक धर्म है , ग़रीबी से आर्थिक मुक्ति है और क्रूर संसार से सुरक्षा है । कई लोगों को तो ऐसा लगा , जैसे बचत करने वालों को ' पराजित ' कहना ईशनिंदा है । सबक़ : एक चित्र 1,000 शब्दों जितना मूल्यवान होता है । डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज़ के 120 सालों के चार्ट पर नजर डालें और आपको दिख जाएगा कि बचत करने वाले क्यों और कैसे पराजित होते हैं । चार्ट दिखाता है कि इस नई सदी के शुरुआती 10 वर्षों में शेयर बाजार में तीन भारी क्रैश हुए हैं । अगले पेज पर दिया चार्ट इन क्रैशों को चित्रित करता है । पहला क्रैश सन 2000 के आस - पास का डॉट कॉम क्रैश था । दूसरा क्रैश 2007 का रियल एस्टेट क्रैश था और तीसरा 2008 का बैंकिंग क्रैश था ।
बीस साल बाद 1997 में रिच डैड पुअर डैडएक चेतावनी थी , भविष्य के बारे में सबक़ों की पुस्तक । बीस साल बाद संसार के करोड़ों लोग मेरे अमीर डैडी की भविष्य के बारे में चेतावनियों और सबक़ों के बारे में ज़्यादा जागरूक हो चुके हैं 20/20 दूरदर्शिता के साथ कई लोगों ने कहा है कि उनके सबक़ भविष्यदर्शी थे ... भविष्यवाणियाँ सच हो गईं । इनमें से कुछ सबक़ ये हैं : अमीर डैडी का सबक़ # 1 : " अमीर लोग पैसे के लिए काम नहीं करते । " बीस साल पहले कई प्रकाशकों ने मेरी पुस्तक को अस्वीकार कर दिया था , क्योंकि वे अमीर डैडी के पहले सबक़ से सहमत नहीं थे । आज लोग अमीरों और बाक़ी हर व्यक्ति के बीच की बढ़ती खाई के बारे में ज़्यादा जागरूक हैं । 1993 और 2010 के बीच अमेरिका की राष्ट्रीय आमदनी में 50 प्रतिशत से ज़्यादा वृद्धि सबसे दौलतमंद एक प्रतिशत लोगों के पास गई । तब से स्थितियाँ बदतर ही हुई हैं । यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया के अर्थशास्त्रियों ने पाया है कि 2009 और 2012 के बीच 95 प्रतिशत आय उन्हीं सबसे दौलतमंद एक प्रतिशत व्यक्तियों के पास गई । सबक़ : आय में वृद्धियाँ कर्मचारियों के नहीं , उद्यमियों और निवेशकों के पास जा रही हैं - उन लोगों के पास नहीं , जो पैसे के लिए काम करते हैं । "
अमीर डैडी का सबक़ : " बचत करने वाले पराजित होते हैं । " बीस साल पहले ज़्यादातर प्रकाशक अमीर डैडी के इस सबक़ से पुरज़ोर तरीक़े से असहमत थे । ग़रीब और मध्य वर्ग के लिए ‘ पैसे बचाना ' एक धर्म है , ग़रीबी से आर्थिक मुक्ति है और क्रूर संसार से सुरक्षा है । कई लोगों को तो ऐसा लगा , जैसे बचत करने वालों को ' पराजित ' कहना ईशनिंदा है । सबक़ : एक चित्र 1,000 शब्दों जितना मूल्यवान होता है । डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज़ के 120 सालों के चार्ट पर नजर डालें और आपको दिख जाएगा कि बचत करने वाले क्यों और कैसे पराजित होते हैं । चार्ट दिखाता है कि इस नई सदी के शुरुआती 10 वर्षों में शेयर बाजार में तीन भारी क्रैश हुए हैं । अगले पेज पर दिया चार्ट इन क्रैशों को चित्रित करता है । पहला क्रैश सन 2000 के आस - पास का डॉट कॉम क्रैश था । दूसरा क्रैश 2007 का रियल एस्टेट क्रैश था और तीसरा 2008 का बैंकिंग क्रैश था ।
अमीर को बचाना 2000 से 2016 के बीच अर्थव्यवस्था को बचाने के नाम पर पूरे संसार के बैंक ब्याज दरों में कटौती करते रहे और नोट छापते रहे , हालाँकि हमारे लीडर हमें यह विश्वास दिलाना चाहते थे कि वे संसार को बचा रहे थे , ले किन सच्चाई तो यह थी कि अमीर लोग ख़ुद को बचा रहे थे और ग़रीब तथा मध्यवर्गीय लोगों को बस के नीचे फेंक रहे थे । आज कई देशों में ब्याज दर शून्य से भी कम है , इसीलिए बचत करने वाले पराजित होते हैं । आज सबसे ज़्यादा पराजित लोग ग़रीब और मध्यवर्गीय हैं , जो पैसे के लिए काम करते हैं और पैसे बचाते हैं । अमीर डैडी का सबक़ : " आपका मकान संपत्ति नहीं है । " बीस साल पहले 1997 में मुझे अस्वीकृति की पर्ची भेजने वाले हर प्रकाशक ने अमीर डैंडी के इस सबक़ की आलोचना की कि “ आपका मकान संपत्ति नहीं है । " में दस साल बाद 2007 में जब सबप्राइम क़र्जदारों ने अपने सबप्राइम मॉर्गेज की क़िस्त चुकाना बंद कर दी , तो संसार का रियल एस्टेट बुलबुला फूट गया और करोड़ों मकान मालिकों को इस सबक़ की सच्चाई कठोर तरीक़े से पता चली । उनका मकान सचमुच ' संपत्ति ' नहीं था । असली समस्या ज़्यादातर लोग यह नहीं जानते कि रियल एस्टेट क्रैश वास्तव में रियल एस्टेट क्रैश नहीं था । रियल एस्टेट क्रैश ग़रीब लोगों की वजह से नहीं हुआ था । यह तो अमीरों की वजह से हुआ था । अमीरों ने वित्तीय जुगाड़ करके डेरिवेटिव्ज़ नामक प्रॉडक्ट बनाए- जिन्हें वॉरेन बफ़े ने “ सामूहिक वित्तीय विनाश के हथि यार " कहा है । जब सामूहिक विनाश के इन वित्तीय हथियारों में विस्फोट हुआ , तो रियल एस्टेट मार्केट क्रैश हो और दोष ग़रीब , सबप्राइम क़र्ज़ लेने वालों पर मढ़ा गया । गया ... 2007 में वित्तीय डेरिवेटिव्ज़ में लगभग 700 ट्रिलियन डॉलर थे । आज यह अनुमान लगाया जाता है कि वित्तीय डेरिवेटिव्ज़ में 1.2 क्वाड्रिलियन डॉलर हैं । दूसरे शब्दों में , असली समस्या कम नहीं हुई है , बल्कि ज़्यादा बढ़ गई है ।
अमीर डैडी का सबक़ : " अमीर लोग कम टैक्स क्यों देते हैं । " बीस साल पहले कई प्रकाशकों ने यह उजागर करने के लिए रिच डैड पुअर डैड की आलोचना की थी कि अमीर लोग टैक्स में कम कैसे और क्यों देते हैं । एक ने कहा कि यह सबक़ ग़ैर - क़ानूनी है । दस साल बाद 2007 में राष्ट्रपति बराक ओबामा पूर्व गवर्नर मिट रॉमनी के ख़िलाफ़ पुनर्चुनाव के लिए खड़े हुए । जब यह उजागर किया गया कि राष्ट्रपति ओबामा ने अपनी आमदनी का लगभग 30 प्रतिशत टैक्स में दिया और गवर्नर रॉमनी ने 13 प्रतिशत से कम दिया , तो मिट रॉमनी की वह नीचे गिरने वाली ढलान शुरू हुई , जि सके बाद वे चुनाव हार गए । एक बार फिर टैक्स 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में केंद्र बिंदु बन गया । मिट रॉमनी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प क़ानूनी रूप से कम टैक्स क्यों देते हैं , यह पता लगाने के बजाय ग़रीब और मध्यवर्गीय लोग नाराज़ हो जाते हैं । हालाँकि राष्ट्रपति ट्रम्प ग़रीबों और मध्य वर्ग के लिए टैक्स कम करने का वादा करते हैं , लेकिन सच तो यह है कि अमीर लोग टैक्स में हमेशा कम चुकाएँगे । अमीर लोग कम टैक्स देते हैं , इसका कारण अमीर डैडी के सबक़ क्रमांक एक में मिलता है : “ अमीर लोग पैसे के लिए काम नहीं करते । " जब तक कोई व्यक्ति पैसे के लिए काम करता है , वह टैक्स चुकाएगा । जब राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन अमीरों पर टैक्स बढ़ाने का वादा कर रही थीं , तो वे असली अमीरों पर नहीं , बल्कि ऊँची आमदनी वाले लोगों जैसे डॉक्टरों , अभिनेताओं और वकीलों पर टैक्स बढ़ाने का वादा कर रही थीं ।