A.S.F.V(African Swine Fever Virus)
पूरी दुनिया अभी कोरोना वायरस से परेशान है,जिसके कारण उसने वैश्विकरण की दुनिया में अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। अभी इससे दुनिया निजात पायी नहीं वहीं भारत में एक नया वायरस का आगमन हो गया है। हालांकि ये वायरस मनुष्यों के लिए अभी खतरा नहीं है। लेकिन हो सकता है आने वाले समय में प्रभावित करने लगे। चीन से ही एक के बाद एक वायरस निकलकर सामने आ रहे हैं। कभी कोरोना तो कभी हंटा और अब ये ए.एस.एफ. वायरस। हालांकि हंटा काबू पा लिया गया है,जो चूहों से फैलने वाला वायरस था।
ये अफ्रिकन स्वाइन फीवर सूअरों में होने वाली संक्रामक बिमारी है। यह डबल स्ट्रैण्ड डी.एन.ए. वारस है। जबकि कोरोना आर.एन.ए. वायरस है। ए.एस.एफ. के लक्षण में उच्च ज्वर,उल्टी,दस्त,सांस लेने ओर खड़ा होने में समस्या होती है। ये नानट्रीटमेंट बिमारी है।
इसलिए केंद्र सरकार नें राज्य सरकार को इन्हें मारने का आदेश दे दिया है। इससे संक्रमित होने वाले सभी सूअर मर ही जाते हैं। अर्थात मृत्यु दर लगभग 100% है। ये वायरस सूअर के मांस,लार,रक्त एवं ऊतक के जरिए फैलता है। इस रोग की शुरूआत अरूणांचल प्रदेश से सटे चीन के जिजांग प्रांत के एक गांव से हुई और फिर असम पहुंची। असम में सूअर फार्म में काम करने वाले एक कर्मचारी के सूअर की मोत भी अफ्रीकी स्वाइन फीवर से हुई थी,और फिर उस फार्म के 230 सूअर मर गये। संदेह है कि कर्मचारी के जरिए ही यह वायरस फार्म तक पहुंचा। हालांकि मानव इससे अभी प्रभावित नहीं है लेकिन इसका वाहक जरुर है।
इस वायरस की जानकारी सर्वप्रथम 1920 में हुई थी। 1950 में पहली बार यूरोप में इसे देखा गया और उसे खत्म करने में दशकों का समय भी लगा था। ऐसा माना जाता है कि सूअर के दूषित मांस के जरिए पूर्वी अफ्रीका से पूरे जार्जिया में फैला। 2007 में जार्जिया में इसे डिडेक्ट किया गया। उसके बाद पूर्वी यूरोप,पश्चिमी यूरोप एवं रुस के जरिए 2019 में चीन में पहुंचा। अब भारत में भी दस्तक दे चुका है। अब तक इससे 2900 सूअर मारे जा चुके हैं भारत में।
पूरी दुनिया अभी कोरोना वायरस से परेशान है,जिसके कारण उसने वैश्विकरण की दुनिया में अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। अभी इससे दुनिया निजात पायी नहीं वहीं भारत में एक नया वायरस का आगमन हो गया है। हालांकि ये वायरस मनुष्यों के लिए अभी खतरा नहीं है। लेकिन हो सकता है आने वाले समय में प्रभावित करने लगे। चीन से ही एक के बाद एक वायरस निकलकर सामने आ रहे हैं। कभी कोरोना तो कभी हंटा और अब ये ए.एस.एफ. वायरस। हालांकि हंटा काबू पा लिया गया है,जो चूहों से फैलने वाला वायरस था।
ये अफ्रिकन स्वाइन फीवर सूअरों में होने वाली संक्रामक बिमारी है। यह डबल स्ट्रैण्ड डी.एन.ए. वारस है। जबकि कोरोना आर.एन.ए. वायरस है। ए.एस.एफ. के लक्षण में उच्च ज्वर,उल्टी,दस्त,सांस लेने ओर खड़ा होने में समस्या होती है। ये नानट्रीटमेंट बिमारी है।
इसलिए केंद्र सरकार नें राज्य सरकार को इन्हें मारने का आदेश दे दिया है। इससे संक्रमित होने वाले सभी सूअर मर ही जाते हैं। अर्थात मृत्यु दर लगभग 100% है। ये वायरस सूअर के मांस,लार,रक्त एवं ऊतक के जरिए फैलता है। इस रोग की शुरूआत अरूणांचल प्रदेश से सटे चीन के जिजांग प्रांत के एक गांव से हुई और फिर असम पहुंची। असम में सूअर फार्म में काम करने वाले एक कर्मचारी के सूअर की मोत भी अफ्रीकी स्वाइन फीवर से हुई थी,और फिर उस फार्म के 230 सूअर मर गये। संदेह है कि कर्मचारी के जरिए ही यह वायरस फार्म तक पहुंचा। हालांकि मानव इससे अभी प्रभावित नहीं है लेकिन इसका वाहक जरुर है।
इस वायरस की जानकारी सर्वप्रथम 1920 में हुई थी। 1950 में पहली बार यूरोप में इसे देखा गया और उसे खत्म करने में दशकों का समय भी लगा था। ऐसा माना जाता है कि सूअर के दूषित मांस के जरिए पूर्वी अफ्रीका से पूरे जार्जिया में फैला। 2007 में जार्जिया में इसे डिडेक्ट किया गया। उसके बाद पूर्वी यूरोप,पश्चिमी यूरोप एवं रुस के जरिए 2019 में चीन में पहुंचा। अब भारत में भी दस्तक दे चुका है। अब तक इससे 2900 सूअर मारे जा चुके हैं भारत में।


